सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। करीब ढाई घंटे चली सुनवाई के दौरान अदालत में कुत्तों के व्यवहार, उनके मूड, काउंसलिंग पर चर्चा हुई। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह मामला केवल कुत्तों के काटने तक सीमित नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और सार्वजनिक सुरक्षा से भी जुड़ा है।
कुत्तों से खतरा – जस्टिस नाथ
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने कहा कि बात सिर्फ काटने की नहीं है, कुत्तों से खतरा भी होता है। दुर्घटनाओं का खतरा है। सड़कों को सुरक्षित रखना जरूरी है, लेकिन आप कैसे पहचानेंगे कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है ?
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कपिल सिब्बल ने दी कुत्तों के पक्ष में दलील
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आवारा कुत्तों के पक्ष में पैरवी करते हुए कहा कि कुत्ते स्वभाव से आक्रामक नहीं होते। उन्होंने कहा कि जब भी मैं मंदिरों या धार्मिक स्थलों पर गया हूं, मुझे किसी कुत्ते ने नहीं काटा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आप खुशकिस्मत हैं, लेकिन बाकी लोग नहीं। बच्चों को काटा जा रहा है, लोग मर रहे हैं।
8 जनवरी को अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई को बुधवार दोपहर रोक दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे से फिर सुनवाई होगी।



