भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों लक्जमबर्ग और फ्रांस की छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। अपनी इस आधिकारिक दौरे के दौरान पहले वह लक्जमबर्ग पहुंचे, जहां उन्होंने शीर्ष नेतृत्व से मिले। राजनीतिक तनावों के बीच उनकी यह यात्रा भारत और यूरोप के बीच राजनयिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
भारत पर भरोसा, कई वर्षों के अनुभव का परिणाम – एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया का भारत पर जो भरोसा है, वह “कई वर्षों के अनुभव का परिणाम है, न कि किसी एक घटना का।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा जब कोविड-19 महामारी आई, तो हमारे लगभग सभी पड़ोसी देशों को भारत से ही पहला टीका मिला। श्रीलंका में चक्रवात हो या म्यांमार और अफगानिस्तान में भूकंप भारत हमेशा सबसे पहले मदद के लिए पहुंचा।
“दुनिया जो कहती है, वह करती नहीं” – एस. जयशंकर
अंतरराष्ट्रीय मामलों में पश्चिमी देशों के दोहरे रवैये की आलोचना करते हुए जयशंकर ने कहा आज देश वही करते हैं, जिससे उन्हें फायदा होता है। सलाह मुफ्त में देंगे, लेकिन जब कार्रवाई का समय आता है तो पीछे हट जाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई बार देश यह कहते हैं कि हमें चिंता है या आप ऐसा न करें, लेकिन वे खुद अपने क्षेत्र की हिंसा और अस्थिरता की अनदेखी करते हैं। दुनिया का यही स्वभाव है, लोग जो कहते हैं, वह करते नहीं हैं। हमें इसे इसी भावना से स्वीकार करना होगा।
वेनेजुएला संकट पर भारत का रुख
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से जुड़े सवाल पर जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “मुझे लगता है कि हमने कल एक बयान जारी किया था, इसलिए मैं आपसे उसे देखने का आग्रह करूंगा। हम घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं, लेकिन हम इसमें शामिल सभी पक्षों से आग्रह करेंगे कि वे अब बैठकर ऐसी स्थिति पर पहुंचें जो वेनेजुएला के लोगों की भलाई और सुरक्षा के हित में हो क्योंकि आखिरकार हमारी चिंता यही है कि हम वेनेजुएला को एक ऐसे देश के रूप में देखना चाहते हैं जिसके साथ हमारे कई सालों से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। हम चाहते हैं कि लोग घटनाओं की जो भी दिशा हो, उससे सुरक्षित बाहर निकलें”



