Saturday, February 7, 2026
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बांग्लादेश में हिंदू विधवा के साथ हैवानियत की सारी हदें पार, सितम की कहानी सुनकर कांप जाएगा दिल

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसक घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। हाल ही में झिनैदह जिले से सामने आया एक मामला मानवता को झकझोर देने वाला है, जहां एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला को अमानवीय अत्याचार का शिकार बनाया गया। यह घटना केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि सामाजिक असहिष्णुता और कमजोर वर्गों की असुरक्षा को उजागर करती है।

क्या है मामला?

यह घटना झिनैदह जिले के कालिगंज क्षेत्र में शनिवार रात घटी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि उसने लगभग ढाई वर्ष पहले शाहीन नामक व्यक्ति और उसके भाई से करीब 20 लाख टका में एक दो-मंजिला मकान और लगभग 300 डिसमल जमीन खरीदी थी। संपत्ति की बिक्री के बाद से ही आरोपी की नीयत बदल गई और उसने महिला को लगातार परेशान करना शुरू कर दिया। महिला के अनुसार, आरोपी लंबे समय से उस पर अनुचित दबाव बना रहा था और आपत्तिजनक व्यवहार कर रहा था। सामाजिक रूप से अकेली और विधवा होने के कारण उसे कमजोर समझकर डराने-धमकाने की कोशिश की गई।

जब महिला ने किसी भी प्रकार के समझौते या दबाव के आगे झुकने से इनकार किया, तो आरोपी ने बदले की भावना से अपराध को अंजाम दिया। शिकायत में बताया गया कि शनिवार रात आरोपी और उसके एक सहयोगी ने महिला को जबरन पकड़ लिया। उसे बंधक बनाकर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसके बाद उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के उद्देश्य से क्रूरता की गई, जिससे वह बेहोश हो गई। बाद में स्थानीय लोगों ने उसे घायल अवस्था में देखा और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

अस्पताल वालों ने क्या कहा ?

झिनैदह जनरल अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मोहम्मद मुस्तफिजुर रहमान के अनुसार, महिला गहरे सदमे में थी और शुरू में अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं रख पा रही थी। चिकित्सकीय जांच में गंभीर शारीरिक उत्पीड़न की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस को सूचित किया गया।

पुलिस ने की कार्रवाई

झिनैदह के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बिलाल हुसैन ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। कालिगंज थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी शाहीन और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना केवल एक महिला तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर महिलाओं के खिलाफ हिंसा, जमीन विवाद और जबरन दबाव के कई मामले सामने आए हैं। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि भय और सामाजिक दबाव के चलते अनेक पीड़ित महिलाएं सामने आने से डरती हैं।

यह भी पढ़ें : बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले तेज, 24 घंटे में दूसरी हत्या; मणि चक्रवर्ती…

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