ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ पिछले सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने सोमवार को अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह (Travel Advisory) जारी करते हुए ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से अगली सूचना तक बचने की अपील की है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी सलाह में कहा गया है कि ईरान में मौजूद भारतीय नागरिक और पहचानकर्ता (PIO/OCI) अत्यधिक सतर्कता बरतें, विरोध प्रदर्शनों वाले इलाकों से दूर रहें और स्थानीय हालात पर लगातार नजर बनाए रखें।
भारतीयों को दूतावास और समाचारों पर नजर रखने की सलाह
यात्रा सलाह में यह भी कहा गया है कि ईरान में रह रहे भारतीय नागरिक तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल के साथ-साथ स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों के अपडेट नियमित रूप से देखते रहें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दूतावास से संपर्क करने की भी सलाह दी गई है।
लगातार 9वें दिन सड़कों पर उतरे लोग
ईरान में विरोध प्रदर्शन लगातार नौवें दिन भी जारी रहे। रविवार को सामने आए वीडियो फुटेज में राजधानी तेहरान के अलावा फार्स, इलम, उत्तरी खोरासान और सेमनान प्रांतों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होते दिखाई दिए। कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की खबरें भी सामने आई हैं।
26 प्रांतों में फैला आंदोलन, 19 प्रदर्शनकारियों की मौत का दावा
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, बीते एक सप्ताह में ईरान के 31 में से 26 प्रांतों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन झड़पों में अब तक कम से कम 19 प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के एक सदस्य की मौत की पुष्टि की गई है। हालांकि, ईरानी प्रशासन की ओर से आधिकारिक आंकड़ों को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
ट्रंप की चेतावनी: “और मौतें हुईं तो कड़ी सजा मिलेगी”
ईरान में बिगड़ते हालात पर अमेरिका ने भी सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों की और मौतें होती हैं तो ईरानी अधिकारियों को “बहुत कड़ी सजा” भुगतनी पड़ेगी। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “हम इस पर बहुत कड़ी नजर रख रहे हैं। अगर वे पहले की तरह लोगों को मारना शुरू करते हैं, तो मुझे लगता है कि अमेरिका उन्हें कड़ी टक्कर देगा।”
ईरानी संसद अध्यक्ष का बयान: मांगें सुनी जाएं, विदेशी दखल पर सख्ती
इस बीच, ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने भी हालात पर प्रतिक्रिया दी है। सोमवार सुबह उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुना जाना चाहिए और उन्हें भरोसे में लेना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि विरोध प्रदर्शनों का फायदा उठाने की कोशिश करने वाले विदेशी एजेंटों और हस्तक्षेपों का “प्रभावी ढंग से सामना” किया जाएगा। उनके इस बयान को सरकार की ओर से सख्त रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ी, हालात पर नजर
ईरान में जारी यह संकट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनता जा रहा है। भारत समेत कई देश अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को किस तरह संबोधित करती है और क्या हालात शांत होते हैं या और बिगड़ते हैं।



