Friday, February 6, 2026
Google search engine
HomeUncategorizedसभी धर्मों में नववर्ष की तारीख अलग- अलग क्यों ?

सभी धर्मों में नववर्ष की तारीख अलग- अलग क्यों ?

2025 के बाद 2026 का बेहद खुशी के साथ स्वागत किया गाय। नए साल से जुड़ी कुछ जरूरी बाते हैं, जो हम में से बहुत कम लोग जानते होंगे। इस संपूर्ण लेख में हम जानेंगे कि आखिर भारत में 5-5 बार नववर्ष मनाए जाने के पीछे का इतिहास क्या है ?

क्यों मनाते हैं नया वर्ष ?

नया वर्ष हमारे जीवन में नई शुरुआत, उम्मीदें और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, इसके पीछे तर्क है कि ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक 1 जनवरी को नया वर्ष मनाया जाता है। जनवरी शब्द रोमन देवता ‘जेनस’ से आया है और इन्हें रोमन में शुरुआत के देवता माना जाता है। इसके अलावा ग्रेगोरियन कैलेंडर दुनिया में सबसे सटीक मानी जाती है।

कब मनाया जाता है हिंदू नववर्ष

हिंदू नववर्ष को चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तारीख से होता है। मान्यता है कि चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तारीख को हिंदू नववर्ष की शुरुआत हुई थी। हिंदू मान्याताओं में प्रचलित कथाओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा देवता ने दुनिया की रचना करनी शुरू की थी। इसलिए, इस दिन को नववर्ष के तौर पर मनाया जाता है। साथ ही, इसे भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

कब मनाते हैं ईसाई नववर्ष

नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है। इसकी शुरूआत रोमन कैलेंडर से हुई थी, जबकि इससे पहले रोमन कैलेंडर में नववर्ष को 1 मार्च के दिन मनाया जाता था। मान्यता है कि जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूरियन कैलेंडर का निर्माण किया था, तभी से ईसाई नववर्ष मानने की प्रथा शुरू हुई।

कब मनाते हैं पंजाबी नववर्ष

सिख नानकशाही कैलेंडर के मुताबिक पंजाबी नववर्ष को बैसाखी के पावन अवसर पर मनाया जाता है। हालांकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार बैसाखी हर वर्ष 13 अप्रैल के दिन होती है। बता दें कि सिख नानकशाही कैलेंडर सिखों के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली है, जिसे श्री गुरु नानक देव जी के नाम पर सन् 2003 में स्थापित किया गया था। इसे स्थापित करने का लक्ष्य सिख त्योहारों और आयोजनों के लिए तारीख को निर्धारित करना था। इस सिख नानकशाही कैलेंडर को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा अपनाया गया था।

कब मनाया जाता है जैन नववर्ष

भारत में जैन समुदाय के लोग कम हैं, इसलिए जैन नववर्ष के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होगी। बता दें कि दीपावली के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को जैन समाज नववर्ष मनाते हैं। ऐसा माना जाता है कि दीपावली के अगले दिन ही प्रभु महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी, इसे जैन धर्म में वीर निर्वाण संवत के नाम से जाना जाता है। इसलिए, दीपावली के अगले दिन ही जैन समाज के लोग नववर्ष मनाते हैं।

कब मनाते हैं पारसी नववर्ष

पारसी समाज के अनुसार 3 हजार वर्ष पहले इसे शाह जमशेदजी ने नववर्ष मनाया था। इसलिए, पारसी नववर्ष को जमसेदी नवरोज भी कहा जाता है। पारसी समाज अपने नववर्ष को शहंशाही कैलेंडर के हिसाब से मनाते हैं। बता दें कि इसमें लीप वर्ष को शामिल नहीं किया जाता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments