Friday, February 6, 2026
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‘5 जनवरी से मनरेगा बचाओ अभियान होगा शुरू’ CWC मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बड़ा ऐलान…

कांग्रेस ने शनिवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह 5 जनवरी 2026 से ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ के नाम से देशभर में आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी के अनुसार यह राष्ट्रव्यापी अभियान केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को समाप्त कर उसकी जगह नया ग्रामीण रोजगार ढांचा लागू करने के फैसले के खिलाफ चलाया जाएगा।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी ग्रामीण मजदूरों, गरीबों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक आवाज उठाएगी। खरगे के मुताबिक मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए आजीविका और सम्मान का सहारा है, जिसे कमजोर या खत्म करने का कांग्रेस हर स्तर पर विरोध करेगी।

मनरेगा का जाना-गरीबों पर वार

खरगे ने संसद के शीतकालीन सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा जैसी ऐतिहासिक योजना को कमजोर कर करोड़ों गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रहार किया है। उन्होंने इसे गरीबों के पेट पर लात और पीठ में छुरा घोंपने जैसा करार दिया। उनके अनुसार मनरेगा को खत्म करना सिर्फ एक योजना का अंत नहीं, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों और उनके सम्मान पर हमला है।

‘मनरेगा ने गांधी जी के सर्वोदय के सपने को किया पूरा’

कांग्रेस अध्यक्ष ने सोनिया गांधी के हालिया लेख का उल्लेख करते हुए कहा कि मनरेगा ने गांधी जी के सर्वोदय के सपने को जमीनी स्तर पर साकार किया था। उन्होंने कहा कि इस योजना का खत्म होना सामूहिक नैतिक विफलता को दर्शाता है, जिसके सामाजिक और आर्थिक असर लंबे समय तक दिखेंगे। खरगे ने याद दिलाया कि काम करने का अधिकार संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों की आत्मा है, जिसे यूपीए सरकार ने शिक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और रोजगार के अधिकारों के जरिए मजबूती दी थी।

पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बनाने का आरोप

खरगे ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां आम जनता से ज्यादा चुनिंदा बड़े उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के उस विचार को दोहराया, जिसमें विशेषाधिकार और एकाधिकार का विरोध किया गया था। उनका कहना था कि जो व्यवस्था समाज के साथ साझा नहीं हो सकती, वह नैतिक रूप से स्वीकार्य नहीं हो सकती।

अपने श्रम मंत्री के कार्यकाल को याद करते हुए खरगे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की इस योजना की खुलकर सराहना होती थी। उन्होंने बताया कि 2006 में आंध्र प्रदेश के एक गांव से सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह ने मनरेगा की शुरुआत की थी। समय के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना बनी, जिसने ग्रामीण भारत को सहारा दिया, पलायन रोका और दलितों, आदिवासियों, महिलाओं व भूमिहीन मजदूरों के लिए सुरक्षा कवच का काम किया।

बिना सलाह कानून थोपने का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार ने बिना गहन अध्ययन और राज्यों या विपक्ष से चर्चा किए मनरेगा को खत्म कर नया कानून लागू कर दिया। उन्होंने इसकी तुलना कृषि कानूनों से की, जिन्हें बिना परामर्श के लागू किया गया और बाद में जनता के दबाव में वापस लेना पड़ा।

देशव्यापी आंदोलन के संकेत

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, संविधान की मूल भावना को ठेस पहुंच रही है और आम नागरिकों के अधिकार लगातार सीमित होते जा रहे हैं। खरगे के मुताबिक यह वक्त सिर्फ हालात का जायजा लेने का नहीं, बल्कि आने वाले संघर्ष की दिशा तय करने का निर्णायक मोड़ है।

खरगे ने बताया कि सैकड़ों जिलों में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति हो चुकी है और शेष जिलों में यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। लक्ष्य बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना है। साथ ही उन्होंने 2026 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों का भी जिक्र किया। इसी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पार्टी 5 जनवरी, 2026 से पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ शुरू करेगी।

खरगे ने SIR को लेकर कही ये बात

खरगे ने SIR प्रक्रिया को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए आरोप लगाया कि दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर सूची की जांच करने की अपील की। साथ ही ED, CBI और IT के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस यह लड़ाई सड़क और अदालत दोनों स्तरों पर लड़ेगी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की निंदा की और देश के भीतर भी सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।

दिग्विजय सिंह का बयान

CWC बैठक में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने संगठन के केंद्रीकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि संगठन में विकेंद्रीकरण जरूरी है। उनके मुताबिक प्रदेशों में अध्यक्ष तो घोषित कर दिए जाते हैं, लेकिन कमेटियों का गठन नहीं होता, जिससे संगठनात्मक संतुलन प्रभावित होता है। कुल मिलाकर, इस बैठक में कांग्रेस ने साफ संकेत दे दिया कि आने वाले समय में पार्टी सिर्फ चुनावी मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि वैचारिक संघर्ष और जनआंदोलनों के जरिए भी सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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