केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने और उसमें संशोधन की संभावनाओं के विरोध में रविवार को इंडियन नेशनल कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर अमृतसर में जोरदार प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन कंपनी बाग स्थित महात्मा गांधी स्मारक के समीप आयोजित किया गया, जिसमें कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन में कांग्रेस के जिला प्रधान मिट्ठू मदान, पूर्व मंत्री अनिल जोशी, पूर्व विधायक जुगल किशोर शर्मा, ममता दत्ता सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने एक सुर में कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों की आजीविका की लाइफलाइन है, जिसे राजनीतिक कारणों से कमजोर या बदला नहीं जाना चाहिए।
गांधी के नाम को हटाने का प्रयास बताया हमला
कांग्रेस जिला प्रधान मिट्ठू मदान ने आरोप लगाया कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने का प्रयास देश की *ग्राम स्वराज की अवधारणा* और गांधीवादी दर्शन पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि यह योजना वर्षों से ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सम्मानजनक रोजगार दिया है और आर्थिक संकट के समय यह योजना गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुई है। प्रदर्शन में पार्टी के नगर, जिला और प्रदेश स्तर के कई पदाधिकारी भी शामिल हुए।
2005 में UPA सरकार ने की थी शुरुआत
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि 2005 में यूपीए सरकार ने मनरेगा योजना की शुरुआत ग्रामीण बेरोजगारी और पलायन को रोकने के उद्देश्य से की थी। इस योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में कम से कम 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी दी जाती है। मनरेगा के अंतर्गत मजदूरों को स्थानीय स्तर पर सड़कों की मरम्मत, जल संरक्षण, नालों की सफाई, तालाबों का निर्माण और वृक्षारोपण जैसे विकास कार्यों में लगाया जाता है। इससे न केवल रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिली है।
वित्तीय ढांचे में बदलाव पर जताई चिंता
कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा योजना का नाम बदलने और इसके वित्तीय ढांचे में संशोधन का विचार सीधे तौर पर गरीब और मजदूर वर्ग के हितों पर चोट करेगा। उन्होंने आशंका जताई कि इससे रोजगार के दिनों में कटौती और मजदूरी भुगतान में देरी जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार मनरेगा में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले संसद, राज्यों और ग्रामीण समाज से व्यापक संवाद करे और इस योजना की मूल भावना को बनाए रखे।
कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा के नाम और स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की, तो पार्टी देशभर में आंदोलन तेज करेगी और ग्रामीण जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष किया जाएगा।



