Saturday, February 7, 2026
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भारत पर लगे टैरिफ को हटाएंगे ट्रंप! डेमोक्रेट सांसदों की खुली चुनौती, अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्ताव पेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को लेकर अमेरिका की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को अब अमेरिकी कांग्रेस में खुली चुनौती मिल गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसदों डेबोरा रॉस (नॉर्थ कैरोलिना), मार्क वीजी (टेक्सास) और भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति (इलिनॉय) ने यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक प्रस्ताव पेश कर उस राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को रद्द करने की मांग की है, जिसके आधार पर भारत से आने वाले उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाए गए थे।

दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लेते हुए भारत पर पहले 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। इसके बाद 27 अगस्त 2025 को रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत ‘सेकेंडरी टैरिफ’ लगाने का ऐलान किया गया। इस तरह कई भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे आयात लागत लगभग दोगुनी हो गई।

डेमोक्रेट सांसदों ने इन टैरिफ को “अवैध” बताते हुए कहा है कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम अमेरिकी नागरिकों को हो रहा है। तीनों सांसदों ने एक संयुक्त बयान में कहा, “ये टैरिफ अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं और असल में यह रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर अमेरिकियों पर ही अतिरिक्त टैक्स है। इससे महंगाई बढ़ रही है और उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।”

टैरिफ पर सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया

डेबोरा रॉस ने कहा कि नॉर्थ कैरोलिना की अर्थव्यवस्था भारत से गहराई से जुड़ी हुई है। भारतीय कंपनियों ने राज्य में अरबों डॉलर का निवेश किया है और हजारों नौकरियां पैदा की हैं। ऐसे में ये टैरिफ दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मार्क वीजी ने कहा कि ये अवैध टैरिफ नॉर्थ टेक्सास के आम लोगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने भारत को अमेरिका का एक अहम सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि इस तरह के फैसले रिश्तों को कमजोर करते हैं।

वहीं भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि ये टैरिफ सप्लाई चेन को बिगाड़ रहे हैं, अमेरिकी मजदूरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। उनका कहना है कि टैरिफ हटाने से अमेरिका–भारत के आर्थिक और सुरक्षा संबंध और मजबूत होंगे।

कांग्रेस बनाम राष्ट्रपति की संवैधानिक लड़ाई

यह प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें डेमोक्रेट सांसद और कुछ रिपब्लिकन भी राष्ट्रपति के आपातकालीन अधिकारों पर अंकुश लगाना चाहते हैं। सांसदों का तर्क है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार व्यापार नीति बनाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।

फिलहाल यह प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया जा चुका है। यदि यह निचले सदन से पारित हो जाता है, तो इसे सीनेट में भी पेश किया जाएगा। खास बात यह है कि अगर कांग्रेस के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से यह प्रस्ताव पारित होता है, तो राष्ट्रपति के वीटो को भी ओवरराइड किया जा सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या अमेरिकी कांग्रेस ट्रंप के टैरिफ फैसले को पलटने में कामयाब हो पाती है या फिर राष्ट्रपति की नीति बरकरार रहती है।

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