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राज्यसभा में बोले अमित शाह -“वंदे मातरम् सिर्फ बंगाल नहीं, पूरे विश्व का जयघोष बना”
Monday, February 9, 2026
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राज्यसभा में बोले अमित शाह -“वंदे मातरम् सिर्फ बंगाल नहीं, पूरे विश्व का जयघोष बना”

राज्यसभा में मंगलवार को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर ऐतिहासिक चर्चा हुई। सुबह 11 बजे शुरू हुई कार्यवाही में इस विशेष चर्चा की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। इससे पहले सोमवार को लोकसभा में भी वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर बहस हुई थी।

“वंदे मातरम् देश की आत्मा को जगाने वाला मंत्र” – अमित शाह

चर्चा की शुरुआत करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “वंदे मातरम् के यशोगान के लिए हम यहां आए हैं, ताकि देश के किशोरों, युवाओं और आने वाली पीढ़ियों तक इस गीत का योगदान पहुंच सके। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि मां भारती के प्रति समर्पण, भक्ति और कर्तव्य का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि यह “अमर कृति” हर भारतीय में राष्ट्रप्रेम का भाव जगाती है। शाह ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् की चर्चा की जरूरत आज भी उतनी ही है, जितनी आजादी के आंदोलन के समय थी और यह भावना 2047 तक भारत के निर्माण में प्रेरणा देती रहेगी।

कुछ लोग वंदे मातरम् को राजनीति से जोड़ रहे

अमित शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “कल लोकसभा में कांग्रेस के कई सदस्यों ने पूछा कि इस चर्चा की जरूरत क्या है। उन्हें समझना चाहिए कि वंदे मातरम् पर चर्चा देशभक्ति के प्रति समर्पण का प्रतीक है, न कि राजनीतिक मुद्दा।” उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी विषय पर चर्चा से नहीं डरती “हम संसद का बहिष्कार नहीं करते, हम संवाद में विश्वास रखते हैं।”

“बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने दिया भारत को आत्मा का स्वर”

गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम् के इतिहास को याद करते हुए कहा कि 7 नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत लिखा, जो शुरुआत में एक साहित्यिक रचना थी, लेकिन जल्द ही यह आजादी के आंदोलन का प्रेरणास्रोत बन गया। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का नारा था। यह आजादी के उद्घोष का मंत्र था, जिसने शहीदों को अंतिम क्षण तक प्रेरित किया कि वे अगले जन्म में भी भारत में जन्म लें और फिर से देश के लिए बलिदान दें।”

“वंदे मातरम् सिर्फ बंगाल नहीं, पूरे विश्व का जयघोष बना”

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यद्यपि यह गीत बंगाल में रचा गया था, लेकिन इसकी गूंज पूरे भारत और दुनिया के हर उस कोने तक पहुंची, जहां आजादी के दीवाने थे। उन्होंने आगे कहा कि “जब कोई जवान सीमा पर प्राण त्यागता है, तो उसकी जुबान पर वंदे मातरम् होता है।”

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