Friday, February 6, 2026
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UP विधान परिषद होगी पूरी तरह हाईटेक, सदन की कार्यवाही अब होगी रियल-टाइम डिजिटल

उत्तर प्रदेश विधान परिषद अपने पूरे कामकाज को आधुनिक तकनीक से लैस करने जा रही है। सदन की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल रूप में संरक्षित करने के लिए परिषद डिजिटल रिकॉर्डिंग और प्रबंधन से जुड़े कई अत्याधुनिक सिस्टम लगाने की तैयारी कर चुकी है। इस पहल के साथ यूपी देश का पहला राज्य बन जाएगा जहां विधान मंडल का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होगा और रियल टाइम में एक्सेस किया जा सकेगा।

सदन में लगेगा हाईटेक वीडियो सिस्टम

परियोजना के तहत कुल 110 वीडियो यूनिटें स्थापित की जाएंगी, जिनसे सदन की हर गतिविधि लगातार रिकॉर्ड होगी। इस पूरी व्यवस्था में मल्टी-कैमरा सिस्टम, डेटा कन्वर्जन मशीन और एक उन्नत एनोटेशन सर्वर शामिल होगा। यह सर्वर रिकॉर्ड किए गए वीडियो को सवालों, बहसों और बयानों के हिसाब से टैग करेगा, जिससे किसी भी वीडियो को कुछ ही सेकंड में खोजा जा सकेगा।

यह नया सेटअप न केवल सदन की गति और पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि कार्यवाही को लंबे समय तक डिजिटल रूप में सुरक्षित भी रखेगा।

पुराना रिकॉर्ड भी आएगा डिजिटल रूप में

नए सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि परिषद की दशकों पुरानी वीडियो रिकॉर्डिंग को भी डिजिटाइज करके ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। पूरी रिपॉजिटरी क्लाउड-आधारित होगी, जिसमें सुरक्षा, बैकअप और डाटा लॉस से बचाव की मजबूत व्यवस्था रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे विधायी अनुसंधान, मीडिया रिपोर्टिंग और सदस्यों द्वारा पुराने संदर्भों को ढूंढने में बड़ी सहूलियत मिलेगी।

विधानसभा के बाद परिषद ने भी बढ़ाया कदम

इससे पहले विधानसभा में अध्यक्ष सतीश महाना की पहल पर इसी तरह का डिजिटल मॉडल लागू करने का निर्णय लिया जा चुका है। अब विधान परिषद भी उसी दिशा में आगे बढ़ती हुई अपने कामकाज को पूर्णतः हाईटेक करने की ओर कदम बढ़ा रही है।

निविदा के लिए तय की गई प्रमुख शर्तें

परियोजना के निष्पादन के लिए निविदा आमंत्रित की गई है, जिसमें कई महत्वपूर्ण शर्तें शामिल हैं-

  • परिषद में डेल्टा कंपनी का इंटरैक्टिव डिस्प्ले लगाना अनिवार्य।

  • सप्लायर को 110 वीडियो यूनिट, एनोटेशन सिस्टम और डिजिटल रिपॉजिटरी एक साथ उपलब्ध करानी होंगी।

  • सभी उपकरणों की इंस्टॉलेशन और टेस्टिंग परिषद भवन में ही की जाएगी।

  • आपूर्तिकर्ता का लखनऊ में कार्यालय और सर्विस होना जरूरी।

  • केवल वही कंपनियां आवेदन कर सकेंगी जिनके पास पिछले तीन साल में कम से कम 4.5 करोड़ रुपये की समान श्रेणी की आपूर्ति का अनुभव हो।

यूपी विधान परिषद की यह पहल सूचनाओं के प्रबंधन, पारदर्शिता और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न केवल सदन की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी होगी, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत डिजिटल आर्काइव भी तैयार होगा।

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