Monday, February 9, 2026
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दिल्ली–NCR फिर गैस चैंबर बना,  कई इलाकों में AQI 400 के पार

दिल्ली–NCR में प्रदूषण का संकट बुधवार सुबह चरम पर पहुंच गया। धुंध और धुएं की मोटी परत के नीचे पूरा इलाका दम तोड़ता नजर आया। ठंडी हवा के रुक जाने से प्रदूषक ज़मीन के पास ही ठहर गए, जिसके कारण वातावरण में PM 2.5 का स्तर सामान्य मानकों से कई गुना ऊपर पहुंच गया। सुबह होते ही लोगों ने आंखों में तेज जलन, गले में खराश और सीने में भारीपन जैसी समस्याओं की शिकायतें शुरू कर दीं।

किस इलाके में सबसे ज्यादा जहरीली हवा? AQI 578 तक पहुंचा

सुबह जारी हुए ताजा आंकड़ों में राजधानी के कई हिस्सों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘सीवियर’ श्रेणी में दर्ज हुआ।
सबसे ज्यादा खराब हवा इन इलाकों में मिली-

  • वजीरपुर: AQI 530+

  • नॉलेज पार्क-5 (ग्रेटर नोएडा): AQI 560+

  • बवाना: AQI 570–578

ये सभी स्तर सीधे-सीधे गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव डालने की श्रेणी में आते हैं, जहां स्वस्थ लोगों के लिए भी बाहर निकलना जोखिम भरा हो जाता है। इनके बाद DTU दिल्ली, जहांगीरपुरी, अलिपुर, रोहिणी सेक्टर-16 जैसे क्षेत्र भी AQI 480–500 के आसपास दर्ज किए गए, जो खतरनाक स्थिति की तरफ संकेत है।

मंगलवार से ही बनने लगे थे बुरे हालात

मंगलवार शाम को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट में ही साफ दिख रहा था कि बुधवार सुबह हवा और ज्यादा खराब होने वाली है।

  • दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता ‘वेरी पुअर’ थी

  • ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद ‘सीवियर’ में पहुंच चुके थे

  • नोएडा, बागपत, हापुड़ और मेरठ ‘वेरी पुअर’ से ‘सीवियर’ की सीमा पर बने हुए थे

मौसम में स्थिरता, ठंडी हवा और ऊंचाई पर हवा की कमी ने यह संकट बुधवार को और गहरा दिया।

राजधानी के जिन इलाकों में सबसे ज्यादा असर

बुधवार सुबह निम्नलिखित इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर रही-

  • वजीरपुर – अत्यंत गंभीर

  • बवाना – अत्यंत गंभीर

  • नॉलेज पार्क-5 (ग्रेटर नोएडा) – अत्यंत गंभीर

  • जहांगीरपुरी – गंभीर

  • DTU परिसर, रोहिणी, अलिपुर – बहुत खराब से गंभीर

इन इलाकों में हवा में मौजूद जहरीले कणों की मात्रा इतनी ज्यादा है कि सांस लेना तक भारी हो जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और दमा या हृदय रोग से जूझ रहे लोगों के लिए।

दिल्ली में बढ़ रहा प्रदूषण के खिलाफ जन आक्रोश

लगातार बिगड़ती हवा को लेकर दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
कई सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और स्थानीय निवासियों ने राजधानी में मार्च निकालकर तात्कालिक कदम उठाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें-

सख्त एंटी-पॉल्यूशन एक्शन प्लान, औद्योगिक प्रदूषण पर तुरंत रोक, निर्माण गतिविधियों में सख्ती, थर्मल पावर और बड़े वाहनों पर कार्रवाई, फॉगिंग और स्मॉग टावर जैसी अस्थायी नहीं, स्थायी समाधान

लोगों का आरोप है कि प्रदूषण लगातार ‘वेरी पुअर’ और ‘सीवियर’ श्रेणी में रहने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस असर दिख नहीं रहा, और सरकारें केवल बैठकों और सलाहों तक सीमित हैं।

सांसों पर संकट कब तक?

दिल्ली–NCR में हर सर्दी की तरह इस बार भी हवा जहरीले स्तर पर जा पहुंची है, लेकिन इस बार ठंडी हवा के थम जाने और पराली व स्थानीय प्रदूषण के मिश्रित प्रभाव ने स्थिति को और अधिक खतरनाक बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में सुधार तभी आएगा जब-

  • हवा की गति बढ़े,

  • तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो,

  • और ऊपर की ओर हवा का प्रवाह सुधरे।

तब तक दिल्ली–NCR के करोड़ों लोगों को मास्क, एयर प्यूरीफायर और घर में रहने जैसे सावधानीपूर्ण कदमों पर निर्भर रहना होगा।

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