लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शुक्रवार को पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया। उन्हें एक निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही हिरासत में ले लिया गया। वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
पुलिस की यह कार्रवाई हाल ही में लद्दाख में 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद सामने आई है, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों और बीजेपी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया था। इस हिंसा में 4 लोगों की मौत और 70 से अधिक घायल हुए थे।
NGO का FCRA लाइसेंस भी रद्द
गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले, वांगचुक की संस्था SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) का FCRA लाइसेंस केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया था, जिससे अब संस्था विदेशी फंडिंग नहीं ले सकेगी।
वांगचुक ने बताया ‘बलि का बकरा’ बनाने की साजिश
गिरफ्तारी से पहले पीटीआई-भाषा से बातचीत में वांगचुक ने कहा कि सरकार उन्हें हिंसा का जिम्मेदार ठहराकर “बलि का बकरा” बना रही है। उन्होंने कहा, कि हिंसा के लिए मुझे या कांग्रेस को दोष देना सिर्फ असली समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश है। इससे कोई समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत दो साल की जेल में डालने की साजिश रची जा रही है, और वह इसके लिए मानसिक रूप से तैयार हैं।



