Friday, February 6, 2026
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ACB केजरीवाल से पूछताछ करने वाली Agency कैसे करती है काम?

चुनाव नतीजों से पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर उनका बयान दर्ज करने पहुंची। टीम शुक्रवार को उस मामले में बयान दर्ज करने पहुंची जिसमें अरविंद केजरीवाल समेत आप नेताओं ने खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया था। आरोप था कि आप विधायकों को पार्टी छोड़ने के लिए 15 करोड़ रुपये तक का ऑफर दिया गया था। दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने इन दावों की जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद ACB की टीम आप नेता अरविंद केजरीवाल, मुकेश अहलावत और संजय सिंह के घर जांच के लिए गई थी।

इसी बहाने आइए जानते हैं कि एंटी करप्शन ब्यूरो कैसे काम करता है, किसके आदेश पर जांच शुरू करता है, किन मामलों में एसीबी जांच करता है और क्या एसीबी खुद संज्ञान लेकर जांच शुरू कर सकता है?

कैसे काम करता है एंटी करप्शन ब्यूरो?

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और मुकदमा चलाता है। ACB की टीम भ्रष्ट अधिकारियों और लोगों को पकड़ने के लिए कई तरीके अपनाती है। उन्हें रंगे हाथों पकड़ने के लिए योजना बनाती है। यह फोरेंसिक साइंस की मदद लेती है। यह खुफिया जानकारी जुटाकर उन्हें गिरफ्तार करती है। या फिर जांच और बयानों के आधार पर अपराधी तक पहुंचती है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो विभाग लगभग सभी मामलों में मुखबिर की पहचान गुप्त रखता है।

किस तरह के मामलों में एक्शन लेती है ACB?

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तीन तरह के मामलों में कार्रवाई करता है। पहला है ट्रैप केस। यह वह मामला है जिसमें शिकायतकर्ता किसी लोक सेवक द्वारा रिश्वत मांगने की लिखित शिकायत दर्ज कराता है। शिकायत की सत्यता जांचने के लिए एसीबी की टीम मौके पर जाती है और कार्यवाही को आगे बढ़ाती है।

दूसरा है आय से अधिक संपत्ति का मामला। जब भी कोई लोक सेवक अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करता है, तो उसके पास उसकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति मानी जाती है, तब यह मामला बनता है। ऐसे मामलों में सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है और पूछताछ, जांच या सुनवाई के किसी भी चरण में उसकी पहचान उजागर नहीं की जाती है। जिन मामलों में सूचना देने वाले की मदद से अवैध संपत्ति का पता लगाने/जब्त करने और भ्रष्ट लोक सेवकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने में मदद मिलती है, उन मामलों में सूचना देने वाले को पुरस्कार भी दिया जाता है।

तीसरी श्रेणी में कई तरह के मामले आते हैं। जैसे – ऊंची दरों पर चीजें खरीदकर सरकारी धन का दुरुपयोग करना, झूठी खरीद, फर्जी दस्तावेज, अवैध नियुक्तियां, घटिया काम आदि दिखाना, जिससे बिना किसी जनहित के अनुचित आर्थिक लाभ होता है। ऐसे मामलों में भी सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है और जांच की जाती है।

क्या ACB खुद से भी संज्ञान ले सकता है?

किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उसके खिलाफ शिकायत दर्ज होनी चाहिए, तभी एंटी करप्शन ब्यूरो कार्रवाई करेगा। ACB खुद संज्ञान लेकर मामले को हैंडल नहीं कर सकती। हाल ही में हुए मामले में ACB की टीम दिल्ली एलजी के आदेश पर पहुंची है। केंद्रीय सतर्कता आयोग, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश पर भी ACB जांच शुरू करती है। इसके अलावा आम आदमी की लिखित शिकायत पर भी ACB जांच शुरू कर देती है।

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